सोमवार, अप्रैल 14, 2014

क्या आज के समय में पुरुष और महिला के बिच के रिश्ते, प्यार और शरीर मात्र एक दुसरे के उपभोग की वस्तु बन कर रह गए है?

28 अगस्त 2013 को मैंने अपने फेसबुक वाल पर इलाहाबाद में घटी एक घटना के बाद ये पोस्ट डाला था, वाल को चेक करते हुए ये मुझे फिर से दिखा तो सोचा क्यों न इसे अपने ब्लॉग पर भी डालु। पढ़िए और पसंद आये तो सराहिएगा ........



कहते है, प्यार और क्रोध दोनों अँधा होता है, सोचे जब दोनों मिल जाये तब क्या होता होगा? शायद वही जो इलाहबाद विश्वविद्यालय की छात्रा के साथ हुआ। मीडिया में, लोगो में सबमे केवल यही चर्चा होने लगी। लड़के ने गलत किया, लड़के को उम्रकैद होनी चाहिए तो कोई कह रहा है फासी मिलनी चाहिए। कुछ सडक छाप लोगो और संस्थाओ को ठीक वैसे ही राजनीती करने का मौका मिल गया और कूदने लगे जैसे, बरसात के बाद सोये हुए मेढक। कोई उसे पचास लाख मुआवजा देने को कह रहा है तो कोई सड़क जाम करवा रहा है, कोई यूनिवर्सिटी बंद करवा रहा है तो कोई मीडिया के सामने कूद कूद कर रैली निकलवा रहा है। मीडिया के मेरे मित्र और गुरुजन भी उनका अच्छे से साथ दे रहे है, और बता रहे है की ऐसे पोज दो, ऐसे पत्थर चलाओ, एक साथ हाथ उठाओ तो अच्छी फोटो आएगी भीड़ दिखेगी। उससे भी ज्यादा मजे की बात तो ये है की प्रदर्शनकारियों मे से अधिकतर वो है जो खुद अपने से विपरीत लिंग को मात्र एक उपभोग की वस्तु मानते है और हमेशा एक भागम भाग मचाये रखते है की कौन कमेंट करने में, छेड़खानी करने में, हाथ पकड़ने में, पार्को में बैठने में और उसके बाद कमरे में ले जाने में आगे रहता है? अब वो क्या पुरुष ... क्या महिला ... बस मौका मिलने की देर है।
मन में आपके भी एक सवाल उठ रहा होगा, आखिर जेके इंस्टीटयूट की बीटेक तृतीय वर्ष की छात्रा पर उसके बचपन के दोस्त के द्वारा पेट्रोल में भीगी टीशर्ट फेंककर जलाने की जो घटना हुई उसके पीछे वजह क्या थी? "संछेप में समझिये" -
लड़का और लड़की इंटर तक साथ पढ़े, इस दौरान उनके बिच प्रेम सम्बन्ध बना, दोनों की फोन व फेसबुक पर हमेशा बात और मुलकात होने लगी। तीन साल बाद अब महीने भर से लड़की की नजदीकिय सूरत में रहकर एमटेक कर रहे अपने बचपन के सीनियर से बढ़ गई। और नौबत प्यार के इज़हार के आगे तक बढ़ गयी। पिछले 10 दिनों से लड़की ने जब लड़के से बातचीत बंद कर दी तो वह उससे मिलने के लिए इलाहबाद आ गया। लड़की को उसने फोन कर हॉस्टल से बाहर बुलाया। दोनों साथ काफी देर तक टहलते रहे। इस बीच लड़के ने लड़की का मोबाइल फोन चेक किया, जिसमें फेसबुक पर सीनियर से लंबी बातचीत का ब्योरा था। फेसबुक के जरिए सीनियर को भेजे गए संदेश में लड़की ने प्रेम का इजहार भी किया था। इन बातों से लड़का गुस्से में आ गया। और मजबूरन लड़की पर झुझलाने लगा तो वह उसे छोड़कर आगे बढ़ गई। और फिर क्या हुआ ये सबके सामने है।
इसमें कोई दो राय नहीं है की पुलिश ने बहादुरी का काम किया है पर ... मीडिया और पुलिश कह रही है की पुलिश ने उस हमलावर लड़के को बाद में टैम्पो से पकड़ा जबकि कई प्र्ताय्क्ष्दर्शी कह रहे है की लड़के ने आवेश में आग लगाने के बाद खुद उस लड़की को बचाने की कोशिस की जिसमे उसका भी हाथ काफी जल गया जिसका बाद में सरकारी अस्पताल में इलाज कराया गया। सरकारी डाक्टर कह रहे है लड़की पंद्रह प्रतिशत जली है, प्राइवेट डाक्टर कह रहे है वो तीस प्रतिशत जली है जबकि हिन्दुस्तान में छपी फोटो में वो सामान्य तौर पर स्ट्रेचर पर बैठी दिख रही है। अब हकीकत क्या है ये भगवान् या भुक्तभोगी जाने मै तो स्वतंत्र टिप्पणीकार हु, और केवल यही कहूँगा की कोशिश कीजियेगा प्यार और क्रोध का संगम न होने पाए, वर्ना .........
अब सवाल उठता है? क्या लड़का केवल एकतरफा मोहब्बत करता था? क्या कोई अपनी मोहब्बत को ऐसे ही आग लगा सकता है? आखिर इतनी हिम्मत उसमे आई कहा से? इस हिम्मत के पीछे क्या कारण थे? खुद सोचिये की आप उस लड़के की जगह होते तो क्या करते? दूर से कीचड़ फेकना बड़ा आशान होता है। क्या आप अपनी मोहब्बत को आग में तंदूरी मुर्गी बनने के लिए झोक सकते है? भाई मै तो नहीं।
मै कही से भी उस लड़के का समर्थन नहीं कर रहा हु। उसने गलत किया है इसमें कोई दो राय नहीं है, उसे इसके लिए कड़ी सजा भी मिलनी चाहिए। पर आखिर उसको ये सब करने के लिए मजबूर किसने और क्यों किया? क्या आज के समय में पुरुष और महिला के बिच के रिश्ते, प्यार और शरीर मात्र एक दुसरे के उपभोग की वस्तु बन कर रह गए है? अगर हा तो इसका कारण क्या है? खुद सोचिये और अगर न सोच पाए तो मुझे गरियाइए......

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